इंसान :
हे खुदा ! हैं तू कहा ...हे खुदा ! हैं तू कहा ...
तेरे राह पे चल रहा हूँ
पर मुझे ना मिला है तू कही
हे खुदा ! हैं तू कहा ...
हे खुदा ! हैं तू कहा ...
तेरे बन्दों के संगत में मैं
डूंडा हूँ पर तू ना मिला
हे खुदा ! हैं तू कहा ...
हे खुदा ! हैं तू कहा ...
खुदा :
मुजसे क्यों पूछथे हों ओ इंसान
पूछो अपनी माँ की ममता से
पूछो बछो के मासूमियत से
पूछो मिटटी से उगती अनाज से
पूछो मीटी बारिश के बून्धो से .. जो बना हैं नमकीन सागर ही से
मुझे दूंदने से पहले ओ इंसान कुद दूंद्लो अपने आप को
